बातचीत

हिन्दी फ़िल्मों में बस पैसों के लिये काम किया

प्रसिद्ध अभिनेत्री तथा निर्देशक अपर्णा सेन से बातचीत

फ्लोरेंस के “रिवर टू रिवर फिल्म फेस्टिवल” में डॉ सुनील दीपक को लड़कपन से पसंद अभिनेत्री से रूबरू होने का मौका मिला

Apr 13th 2011

मैं चौबीसों घंटे लेखक ही होता हूँ

December 28, 2008 | 5 Comments

image भारतीय अंग्रेज़ी लेखक अल्ताफ टायरवाला से सामयिकी के संपादक मंडल के सदस्य डॉ सुनील दीपक की बातचीत लेख पढ़ें »
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प्रिंट आन डिमांड से लेखक प्रकाशक भी बने

March 27, 2009 | 3 Comments

image प्रिंट आन डिमाँड सेवा द्वारा सेल्फ पब्लिशिंग अब केवल व्यक्तिगत वैनिटी प्रकाशन नहीं रहा। ईबुक्स के युग में अब प्रकाशक भी इस तकनीक का महत्व समझने लगे हैं। लेख पढ़ें »
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हिन्दी TTS: दृष्टिबाधितों हेतु तकनीकी वरदान

January 29, 2009 | 2 Comments

image टेक्सट-टू-स्पीच जैसी सहायक तकनालाजी दृष्टिबाधितों के लिये कम्प्यूटर व इंटरनेट का इस्तेमाल आसान बना रही है। रवि रतलामी बता रहे हैं कि इनमें काफी अनुप्रयोग हिन्दी में भी उपलब्ध हैं। लेख पढ़ें »
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दर्पण मेरे यह तो बता

February 1, 2009 | 1 Comment

image NDTV ने ब्लॉगर पर डाली कानूनी नकेल, ग्लोबल वार्मिंग के घपले की कहानी और सोशियल मीडिया कंसल्टेंट ही नष्ट कर रहे हैं सोशियल मीडिया को? यह, और भी बहुत सारी इतवारी कड़ियाँ बतायें अंतर्जाल का हाल। लेख पढ़ें »
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खगोल विज्ञान से बढ़ेगी प्रगति

January 26, 2009 | Leave comment

image अंतर्राष्ट्रीय खगोल विज्ञान वर्ष 2009 के उपलक्ष्य में सामयिकी की विशेष श्रृंखला के पहले लेख में दक्षिण अफ्रीकी अंतरिक्ष वैज्ञानिक केविन्द्रन गोवेन्देर बता रहे हैं कि किस तरह खगोल विज्ञान का निर्धन राष्ट्रों में विकास एवं प्रसार उनकी सामाजिक-आर्थिक व्यवस्था के विकास में सहायक सिद्ध हो सकता है। लेख पढ़ें »
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और फिर, वे मुझे मारने आए

January 31, 2009 | 3 Comments

image श्रीलंका जैसे संघर्षरत देश में सच बोलने के खतरे जानते हुये भी कुछ पत्रकार अन्तरात्मा की पुकार पर कलम थामे हुये हैं। प्रस्तुत लेख द संडे लीडर के दिवंगत संपादक का अंतिम संपादकीय है जिसे उन्होंने अपनी हत्या किये जाने पर प्रकाशित करने का निर्देश दिया था। लेख पढ़ें »
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ग्रामीण भारत की बदलती नारी

December 28, 2009 | 3 Comments

image बीते 20 सालों में कुछ ग्रामीण औरतों ने घर के दायरे से बाहर निकल, पंचायती राजनीति में कदम रख ग्रामीण भारत को बदलने की कोशिश की है। उन्हीं की कथायें है "सरपंच साहिब" में। पढ़िये डॉ सुनील दीपक की समीक्षा। लेख पढ़ें »
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क्यों स्लमडॉग मिलियनेयर मुझे प्रभावित न कर सकी?

February 3, 2009 | 6 Comments

image गंदी बस्ती के एक लड़के की रंक से राजा बनने के कथा पर बनी डैनी बॉयल की फिल्म हिट बन चुकी है। सौतिक बिस्वास सवाल उठा रहे हैं कि क्या सचमुच ये फिल्म एक ''मास्टरपीस'' है, जैसा कि इसे बताया जा रहा है। लेख पढ़ें »
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साबुनी रंगभूमि का रियैलिटी सम्मोहन

March 7, 2009 | 1 Comment

image दक्षिणी मुंबई की आलीशान इमारतों के बीच बसे इस साबुनी घाट में वो सारे तत्व हैं जो इस शहर को महानगर बनाते हैं। लेख पढ़ें »
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