आडवाणी पर ओबामा प्रभाव

बॉलीवुड एक्स्ट्रा के रूप में मेरे दिन

मैंने पहली बार ध्यान दिया कि कमरे के आखिरी कोने में 45 डिग्री कोण पर अलमुनियम शीट से विशाल दीवार खड़ी की गई थी। बाहर पानी की टैंकरों की फौज तैनात थी, लॉबी में एक मिनी त्सुनामी पंप करने को तैयार।

“सभी अपने घुटने के बल बैठ जायें”, एक बड़े माईक में डायरेक्टर ने चिल्ला कर कहा। यह एक लंबे कद का उनिंदी आँखों वाला व्यक्ति था जिसे एक ही नाम से जाना जाता है, प्रियदर्शन। वे अपने निर्देश केवल अंग्रेजी में देते और वो भी कम से कम शब्दों में। “जब मैं एक्शन कहुं, तो अपनी जान बचाने के लिये दौड़ पड़ो”।

“जान बचाने के लिये?” जब हम घूटने के बल बैठे तो तल्ख चेहरों पर मुस्कराहट भी मौजूद थी। “मोटर पंप की तरफ मत भागना”, उन्होंने अपनी बात में जोड़ा। दो बड़े मोटरों की गड़गड़ाहट अचानक शुरु हो चुकी थी। “और उन खंबों की तरफ भी नहीं”, उनका इशारा कमरे के बीचों बीच प्लास्टिक से बने महाकाय ढांचें की ओर था। “वो गिर सकता है”। छत पर लोग लकड़ी की शहतीरों पर विशालकाय लाईट ले कर चल फिर रहे थे।

“एंड…एक्शन!” प्रियदर्शन चीखे।

अगले मिनट चीखों और भगदड़ के थे, इनमें से कुछ वास्तविक भी थे, बाकी बेहद नाटकीय। लहर कमरे में थी, लोग और लाल रंग के सोफे भंवर में थे। जब प्रियदर्शन अंततः फिर चीखे, “स्टॉप!” सब बनावटी डर का अभिनय छोड़ हंसने लगे।

“सब ठीक तो हैं?” प्रियदर्शन ने पुछा। सब ठीकठाक थे। बस एक कलाकार दीवार से टकरा गया था। एक एक कर हम लॉबी से बाहर आ गये, हमारे कपड़े तरबतर थे।

“दैट बास्टर्ड”, सर पोंछते हुये माईया ने कहा, “उसने मुझे पानी के बारे में कुछ नहीं बताया था। मेरे कॉन्टैक्ट लैंस की वाट लग गई।”

 

और भी हैं कड़ियाँ:

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