रहस्यवादी संगीत गुरु

नदाल का नया स्पिन

रैफेल नदाल के खेल की अनोखी शैली से उनके चाचा टोनी ने उन्हें विश्व के किसी भी टेनिस खिलाड़ी को पछाड़ने की काबलियत दी। और अब वे उसे और भी ज़्यादा परंपरागत खेल खेलने की नसीहत दे रहे हैं। आस्ट्रेलिया में आयोजित इस साल के पहले ग्रैंड स्लैम में विश्व का नंबर एक खिलाड़ी और उसका कोच एक नई चनौती का सामना कर रहे हैं, क्या अति साधारण खेल जीत दिला सकता है?

रहस्यवादी गरु

ए आर रहमान की जिंदगी के दो मुख्य धुर हैं, संगीत और आध्यात्मिक समर्पण। शोमा चौधरी गोल्डन ग्लोब लेकर लौटे रहमान की प्रतिभा का अन्वेषण कर रही हैं।

A R Rehmanतमिल संगीतकार आर के शेखर और कस्तूरी को ज्योतिषियों ने बता रखा था, कि उनका बेटे का नाम संसार भर को रोशन करेगा। रहमान की बहन कंचना कहती हैं, दिलीप साधारण बच्चों जैसे ही अरमान रखता, देर तक सोना और कैरम खेलना, उसे माँ का पिआनो सीखाने के लिये सात बजे उठाना सख्त नापसंद था। पर माँ को भविष्यवाणी सच कर दिखानी थी। अचानक ही, जब दिलीप 11 साल का था, नियती ने द्वार पर दस्तक दी। उनका परिवार एक सूफ़ी पीर करिमुल्लाह शाह से मिला। शाह ने दिलीप का माथा पढ़ लिया और कहा दस साल बाद यह मुझसे फिर मिलेगा। फिर दिलीप ने ट्रीनिटी कॉलेज, आक्सफॉर्ड से संगीत सीखा और 1987 में अपनी माँ और बहनों से साथ इस्लाम धर्म अपना लिया। 1991 में उसे मणिरत्नम ने रोजा का संगत देने को कहा, दिलीप ने अपना नाम रखा अल्लाह रक्खा रहमान, अल्लाह के 1000 नामों में से पहला नाम।

मैं यहाँ हूँ
कैसा हो अगर आप कहाँ हैं इस बात की जानकारी आपका फोन सबको बता दे, और आप खुद अपने परिचितों और अपरिचितों को भी अपने फोन से खोज सकें?

कुछ भी मौलिक नहीं है

कुछ भी नहीं। कहीं से भी ऐसी चीज़ चुराने से न हिचकिचाईये जिस से आपकी कल्पना को उड़ान मिले और आप को प्रेरणा…बस वही चुरायें जो आपकी आत्मा से सीधे बात करती हो। अगर आपने यह किया तो आपका काम, और चोरी भी, प्रामाणिक होगी। प्रामाणिकता काम की चीज़ है, मौलिकता का तो अस्तित्व ही नहीं है। और अपनी चोरी को छुपायें नहीं उसके मज़े लें। हमेशा गोडार्ड की बात याद रखें, “यह महत्वपूर्ण नहीं कि आपने चीज़ कहाँ से ग्रहण की, बल्कि यह की आपने उसे किस मुकाम तक पहुंचाया”।

व्हाईट हाउस में बदलाव आया है
राष्ट्रपति के किये वादे के मुताबिक WhiteHouse.gov पर सभी गैर आपातकालीन विधेयक राष्ट्रपति के दस्तखत लेने के पहले पाँच दिनों के लिये प्रकाशित किये जायेंगे जहाँ आम जनता इसे पढ़ कर अपनी राय भी दे सकेगी?

कविता का पोस्टमार्टम
ओबामा के शपथ ग्रहण समारोह में एलिज़ाबेथ अलेक्ज़ैंडर की कविता को कईयों ने गद्यात्मक करार दे दिया। अमाँ जान बख्श दो बेचारी की। आन डिमांड कविता और वो भी ऐसे महत्वपूर्ण दिन के लिये…बेहद कठिन मामला होता होगा।

 

कड़ियाँ और भी हैं

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