मिस्ड कॉल किया और चाय हाज़िर

अपनी इंटरनेटिय चहलकदमी के दौरान हुसैन खोज लाये हैं रोचक खबरें और कड़ियाँ

सामयिकी के पूर्वावतार निरंतर के शुरुवाती दौर में, यानि 2005 के आसपास, “कड़ी की झड़ी” नामक एक स्तंभ होता था। इसमें बंगलौर स्थित एक जानेमाने और प्रतिभाशाली वेब डिज़ाईनर हुसैन जाल पर चहलकदमी करते समय जो भी रोचक खोज कर लाते हैं उनका समावेश होता था। सामयिकी में हम प्रत्येक रविवार “कड़ी की झड़ी” पुनः प्रकाशित कर रहे हैं जो हमें उम्मीद हैं आपको ज़रूर पसंद आयेगी। अगर यह लेख आपको जमे तो कड़ी की झड़ी की कुछ पुरानी कड़ियाँ यहाँ, यहाँ और यहाँ भी देख सकते हैं।

देव-डी का संगीत जारी अनुराग कश्यप द्वारा लिखित और निर्देशित इस रूमानी ड्रामा में अभय देओल हैं। अल्बम में संगीतकार अमित त्रिवेदी ने 15 गीत स्वरबद्ध किये हैं, कुछ गीत खुद गाये भी हैं।

गरम चाय चाहिये? मिस्ड कॉल दे दीजीये

मंजूनाथ अपने सेलफ़ोन की मदद से रोज़ाना 2000 कप से ज़्यादा चाय और कॉफी बेचते हैं।

मिस्ड कॉल का एक और अभिनव प्रयोग। भारत में तो शायद मिस्ड कॉल का वास्तविक कॉल से कहीं ज़्यादा उपयोग होता होगा। बंगलौर के चिकपेट इलाके में मंजूनाथ एक टी स्टॉल चलाते हैं। उनके मोबाईल फ़ोन पर 1000 से भी ज्यादा नंबर हैं। एक छोटे दुकानदार के फ़ोन में इतने नंबर? पर इन्हीं की मदद से मंजूनाथ रोज़ाना 2000 कप से ज़्यादा चाय और कॉफी बेच पाते हैं। चाय, कॉफी तो छोटे दुकानों की ही तरह ग्राहक तक पहुंचाई जाती है पर यहाँ निराली बात है आर्डर देने का तरीका। जिसे भी चाय कॉफी चाहिये वो बस मंजूनाथ को एक मिस्ड कॉल दे देता है। मुफ्त में आर्डर दो और मंजूनाथ का आदमी एक बड़े फ्लॉस्क में गरमा गरम पेय लेकर हाज़िर हो जाता है। चाय कॉफी खत्म हो गई हो तो मंजूनाथ अपना सेलफ़ोन कुछ देर स्विच आफ कर देता है।

इस चाय आंदोलन ने तो वाकई दिमाग की बत्ती जला दी, क्यों?

Apu

अपु नाहासापीमा पेटिलन

स्प्रिंगफील्ड 25: सिंप्सन्स के चुनिंदा सह कलाकार इन में शामिल हैं भारतीय मूल के अपु नाहासापीमापेटिलन, और उनकी पत्नी मंजुला, और उनके आठ बच्चे अनूप, उमा, नबेंदु, पूनम, प्रिया, संदीप, शशि और गीत।

जर्नलस्पेस की नौटंकी बैकअप न लेने के कारण सारा का सारा डाटा स्वाहाः आउच्! अपुन ने अपने कंप्यूटर का बैकअप अभीच् ले लिया भाई!

संगीतकार को आनलाईन समर्थकों ने सफल बनाया ब्लॉगों के द्वारा चर्चा से प्रशंसक बनें और एक रिकार्ड डील भी हाथ लग गई

शॉपिंग का विज्ञान: हमारा मस्तिष्क कैसे खरीदारी करता है परचुनिया अपने ग्राहकों के दिमाग की पड़ताल करने में कमाल कर चुके हैं। उन्हें आप के बारे में सब पता है।

और भी हैं कड़ियाँ:

[अनुवाद और मूल लेख से छेड़खानीः देबाशीष]

2 प्रतिक्रियाएं
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  1. मेरे शहर सागर में ऐसा एक शख्‍स बरसों से यही कर रहा है। 🙂

  2. संभव है संजय! हमारे मुल्क में ऐसे अनेकों किस्से निकलेंगे जिनकी केस स्टडीज़ मैनेजमेंट स्कूलों में नही पढ़ाई जातीं। दरकार है कि इन लोगों की इस व्यावसायिक काबलियत पर प्रकाश डाला जाय।

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