बीते 20 सालों में कुछ ग्रामीण औरतों ने घर के दायरे से बाहर निकल, पंचायती राजनीति में कदम रख ग्रामीण भारत को बदलने की कोशिश की है। उन्हीं की कथायें है "सरपंच साहिब" में। पढ़िये डॉ सुनील दीपक की समीक्षा। »
भोपाल गैस त्रासदी के 25 वर्ष पर यूरिग सैनदरेट बता रहे हैं कि किस तरह से गरीब और निरीह जनता ने नित्य प्रति जीवन में दमन के प्रति पहले लचीलापन दिखाया और इसे प्रतिरोध तथा राजनैतिक प्रतिवाद में कैसे बदला। »