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	<title>सामयिकी - हिन्दी वेबपत्रिका &#124; Samayiki - Hindi Webzine &#187; प्रौद्योगिकी</title>
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	<description>बदलती दुनिया की साक्षी</description>
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		<title>हात्सूने मिकु: जापान की अनोखी रॉक स्टार</title>
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		<pubDate>Sat, 20 Nov 2010 23:19:47 +0000</pubDate>
		<dc:creator>देबाशीष चक्रवर्ती</dc:creator>
				<category><![CDATA[प्रौद्योगिकी]]></category>
		<category><![CDATA[Anime]]></category>
		<category><![CDATA[Haksune Miku]]></category>
		<category><![CDATA[Japan]]></category>
		<category><![CDATA[Vocaloid]]></category>
		<category><![CDATA[Yamaha]]></category>

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		<description><![CDATA[सिर्फ सोलह बरस की उम्र में जापान की सबसे मशहूर रॉक गायिका बन चुकी हत्सूने मिकु अगर चाहे तो ताजिंगदी 16 बरस की बने रह सकती है। लिंडसे लोहान की तरह उसके किसी ड्रग स्कैंडल नुमा पचड़ों में पड़ने की संभावनायें भी शून्य हैं। ]]></description>
			<content:encoded><![CDATA[<div class="dropCap">पू</div>
<p>त के पाँव पालने में ही दिख जाते हैं। मोट्जार्ट ने 5 साल की उम्र में अपना पहला संगीत कार्यक्रम पेश किया था, माईकल जैक्सन भी लगभग इसी उम्र से मंच पर गाने लगे थे। <img class="alignright" style="margin: 15px; border: none 0px;" title="Hatsune Miku" src="http://www.samayiki.com/sam/wp-content/uploads/2010/11/hatsune_miku.jpg" alt="Hatsune Miku" width="250" height="375" />होनहार बच्चों के लिये तो यह वाकई बच्चों का ही खेल होता है। दीगर बात है कि मशहूर बन कर ज़िदगी जीना शायद उतना आसान नहीं होता।</p>
<p>जापानी गायिका हात्सूने मिकु भी कमउम्र है। सिर्फ सोलह बरस की उम्र में ही वह जापान की सबसे मशहूर रॉक स्टार बन चुकी है। और अगर वो चाहे तो ताजिंगदी 16 बरस की बने रह रातों रात अर्जित अपनी लोकप्रियता को कायम भी रख सकती है। तिस पर लिंडसे लोहान जैसी लोकप्रिय सितारों की तरह उसके किसी ड्रग स्कैंडल नुमा पचड़ों में पड़ने की संभावनायें भी शून्य हैं। चौंकिये मत, यह संभव है। क्योंकि मिकु कोई जीती जागती लड़की नहीं वरन एक फंतासी किरदार है,  परंतु उसकी न केवल आवाज जापानियों को लुभा रही है वरन् उसकी त्रिआयामी छवि यानि होलोग्राम <em>लाइव </em>कार्यक्रमों में शामिल हो लोगों की धड़कनें तेज करने में कामयाब हो चुकी है।</p>
<p>नीले बालों की चोटियाँ लगाये चटकीली व मासूम आँखें वाली गुड़िया जैसी यह लड़की जापानी <em>आनिमे</em> (Anime) के किसी चरित्र जैसी लगती है। मई 2010 में EXIT TUNES Presents Vocalogenesis नामक एक अल्बम, जिसमें उसके गाये गाने शुमार हैं, <em>बिलबोर्ड </em>पर अव्वल नंबर पाने वाला पहला वोकलायड अल्बम होने का गौरव प्राप्त कर चुका है। और अब तो उसके विश्व भर में जीवंत प्रदर्शन ओर अंग्रेजी गीत गाने की बातें भी चल रही हैं। मिकु का मूल जापानी नाम तीन शब्दों से बना है, &#8220;मिकु&#8221; माने भविष्य, &#8220;हात्सु&#8221; मतलब प्रथम और &#8220;ने&#8221; अर्थात आवाज़।</p>
<p>मिकु मूलतः एक गा सकने वाला सिंदसाइज़र अनुप्रयोग है, इसके पीछे मोटरसाईकल व संगीत वाद्ययंत्र आदि बनाने वाली जापानी कंपनी <strong>यामाहा </strong>की <a href="http://www.vocaloid.com" target="_blank">वोकलायड</a> तकनलाजी का हाथ है। मिकु के पात्र की रचना एक अन्य जापानी कंपनी <a href="http://www.crypton.co.jp" target="_blank">क्रिप्टॉन फ्यूचर मिडिया </a>ने 2007 में की, उसकी आवाज़ एक अभिनेत्री साकी फुजिता के <em>वॉंयस सैंपल</em> पर आधारित है इस तरह मिकु दरअसल एक <em>सॉफ्टवेयर </em>ही है जिसमें बोल ओर तर्ज़ भर देने पर गीत खुद ही तैयार हो जाता है। गीत सुनकर कहना मुश्किल हो जाता है कि यह वाकई किसी कलाकार ने रिकार्ड नहीं किया।</p>
<p><center><object classid="clsid:d27cdb6e-ae6d-11cf-96b8-444553540000" width="560" height="340" codebase="http://download.macromedia.com/pub/shockwave/cabs/flash/swflash.cab#version=6,0,40,0"><param name="allowFullScreen" value="true" /><param name="allowscriptaccess" value="always" /><param name="src" value="http://www.youtube.com/v/-JZO8J2moWA?fs=1&amp;hl=en_US&amp;rel=0&amp;color1=0x3a3a3a&amp;color2=0x999999" /><param name="allowfullscreen" value="true" /><embed type="application/x-shockwave-flash" width="560" height="340" src="http://www.youtube.com/v/-JZO8J2moWA?fs=1&amp;hl=en_US&amp;rel=0&amp;color1=0x3a3a3a&amp;color2=0x999999" allowscriptaccess="always" allowfullscreen="true"></embed></object></center></p>
<p>मिकु हत्सुने की हालिया लोकप्रियता का कारण इंटरनेट पर जारी उसके कुछ विडियो हैं (ऊपर देखें) जिनमें उसके एक त्रिआयामी होलोग्राम को हज़ारों दर्शकों के समक्ष मंच पर बाकायदा नाचते हुये संगीत कार्यक्रम प्रस्तुत करते दिखाया गया है। लोग उसके नाच गाने पर यूं फिदा हो रहे हैं मानो वह कोई जीवंत पॉप स्टार हो। भले ही मिकु की आवाज़ उधार की हो और रूप रंग किसी कलाकार की कल्पना का नतीजा, उसका <em>वर्चुअल </em>किरदार का जादू लोगों के सर चढ़कर बोल रहा है। लिहाज़ा उसका अपना <a title="Hatsune Miku's Facebook Page" href="http://www.facebook.com/pages/Hatsune-Miku/10150149727825637" target="_blank">फेसबुक पृष्ठ</a> भी है और <a title="A Hatsune Miku Fan Website" href="http://www.mikufan.com" target="_blank">फैन साईट</a> भी।</p>
<div id="boxL">
<h2>क्या होते हैं होलोग्राम?</h2>
<p>दूर क्या जाना होलोग्राम तो आपके बटुये में ही हैं साहब। अपने क्रेडिट कार्ड या वोटर परिचय पत्र पर नज़र डालें। विभिन्न उत्पादों पर भी असली नकली का भेद बताने में ये हमारी मदद करते हैं। हालांकि इनको हिलाने डुलाने से आप अलग तरह की चमकदार तस्वीर देख पाते हैं पर से सिर्फ इन चित्रों की तरह इतने सरल नहीं होते। होलोग्राम को यदि वृहद स्तर पर लेज़र या अन्य प्रकाश स्रोतो के साथ प्रस्तुत किया जाय तो ये हमें चमत्कृत कर सकते हैं। अगर होलोग्राफिक तस्वीर के टुकड़े कर दिये जायें तो हर हिस्सा मूल चित्र का पूर्ण रूप दिखा सकता है। मिकु की तरह इनसे त्रिआयामी तस्वीर भी पेश की जा सकती है जिसे देखने के लिये किसी थ्रीडी चश्मे की भी ज़रूरत नहीं पड़ती। इस तकनीक को <em>डायनमिक होलोग्राफी</em> कहा जाता है।</p>
<p>होलोग्राफी का आविष्कार 1947 में हंगरी कै डेनिस गेबर ने किया था। इसके लिये उन्हें 1971 में भौतिकी के नोबल पुरस्कार से भी सम्मानित किया गया।</p>
</div>
<h2>आभासी चरित्र की आभासी लोकप्रियता?</h2>
<p>इंटरनेट के मौजूदा स्वरूप में जहाँ किसी चीज के वाइरल होने पर सोचना पड़ता है कि यह वाकई कोई हक़ीकी वस्तु है या विपणन का हथकंडा, वहाँ यह शक करना गैर वाजिब न होगा कि हात्सुने की कथित लोकप्रियता भी गप्प मात्र हो। क्या मिकु साधारण लोगों के बीच भी लोकप्रिय है? इस बात की पुष्टि के लिये हमने जापान निवासी हमारे नियमित पाठक और <a href="http://jaapaanii.exblog.jp/" target="_blank">पुराने चिट्ठाकार</a> मत्सु से संपर्क किया। मत्सु ने स्पष्ट किया कि मिकु की लोकप्रियता मूलतः इंटरनेट पर मंडराने वाले कंप्यूटर प्रोग्रामर, आनिमे कार्टून के प्रशंसक और युवा इंटरनेट प्रयोक्ताओं तक ही सीमित प्रतीत होती है। इक्का दुक्का <a href="http://www.asahi.com/english/TKY201007180307.html" target="_blank">आनलाइन अखबारों में ज़िक्र</a> के अलावा स्थानीय मुख्यधारा के मीडिया में इसका खास उल्लेख नहीं है, मिकु कमोबेश इंटरनेटिय उप संस्कृति का ही हिस्सा है।</p>
<p>मत्सु के अनुसार आभासी चरित्रों से जापानियों का लगाव कोई नई बात नहीं है, फर्क सिर्फ इतना है कि मिकु के मामले में चरित्र, वोकलायड आवाज़ वगैरह का सृजन किसी आनिमे अथवा कार्टून परियोजना के लिये नहीं वरन एक खास साफ्टवेयर के लिये किया गया।</p>
<p>जैसा कि आपने पहले पढ़ा हात्सूने मिकु एक वोकलायड है, मशीन द्वारा बनाई आवाज़, हालांकि इसकी लोकप्रियता के पीछे अन्य लोगों के इस साफ्टवेयर पर आधारित गीत बनाने की वजह से भी है, जापानियों के तकनीक प्रेम के कारण भी और यूट्यूब जैसी जापानी साईट <a href="http://www.nicovideo.jp/" target="_blank">निको निको दोगा</a> भी जिसने इन विडियो को विशाल श्रोतावर्ग तक पहुँचाया। फिर भी असली ओर नकली के फर्क का सवाल शुद्धतावादी तो उठायेंगे ही। जापान में ही अनेक नामचीन गायक गायिकाओं ने यामाहा को अपनी अवाज़ के सैंपल देने से इंकार कर दिया, आखिरकार खुद का <em>क्लोन </em>बनाकर अपनी आजीविका से कौन हाथ धोना चाहेगा।</p>
<p>इन बहसों के बीच मिकु और उस जैसी अन्य वोकलायड का संगीत अपना कमाल दिखाये जा रहा है। बहरहाल नकली आवाज़ों ओर व्यक्तित्वों से जापानियों का यह लगाव कब तक टिकता है ओर क्या नये आकार लेता है यह तो समय ही बतायेगा।
<p class="note">जानकारी विकीपीडिया व इंटरनेट से, मिकु का चित्र साभारः क्रिप्टॉन फ्यूचर मिडिया, अतिरिक्त जानकारी व लेख में संशोधन के सुझावों के लिये शुक्रिया <a href="http://jaapaanii.exblog.jp/" target="_blank">मत्सु</a>! </p>
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		<title>नटाल: माइक्रोसॉफ़्ट  का नया गेमिंग आविष्कार</title>
		<link>http://www.samayiki.com/2010/01/microsoft-project-natal/</link>
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		<pubDate>Thu, 14 Jan 2010 19:01:06 +0000</pubDate>
		<dc:creator>विनय जैन</dc:creator>
				<category><![CDATA[प्रौद्योगिकी]]></category>
		<category><![CDATA[gaming]]></category>
		<category><![CDATA[Microsoft]]></category>
		<category><![CDATA[natal]]></category>
		<category><![CDATA[Nintendo]]></category>
		<category><![CDATA[Wii]]></category>
		<category><![CDATA[xbox]]></category>

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		<description><![CDATA[अगर आपके विडियो गेम से गेम नियंत्रक या वायरलेस रिमोट कण्ट्रोल हटा दें या फिर ये गेम खेलना मैदान में खेलने जैसा ही बन जाये तो कैसा हो? पढ़ें <b>विनय जैन</b> का आलेख।]]></description>
			<content:encoded><![CDATA[<p><img class="aligncenter" title="Project Natal" src="http://www.samayiki.com/sam/wp-content/uploads/2010/01/natal_story.jpg" alt="" width="460" height="276" /></p>
<div class=dropCap>वि</div>
<p>डियो गेम! यह सुनकर आपके दिमाग में सबसे पहले क्या आता है? और जो भी आता हो, अपने हाथ में आपको कुछ न कुछ ज़रूर दिखता होगा। जैसे कि कोई मोबाइल गेमिंग यंत्र, या फिर तारों और बटनों वाला गेम नियंत्रक, या कम से कम एक वायरलेस रिमोट कण्ट्रोल।</p>
<div id="boxR">
<h2>बच्चों का खेल नहीं ये!</h2>
<p>विडियो गेम कोई छोटा-मोटा बाज़ार नहीं है। टेलीग्राफ अखबार की एक हालिया रिपोर्ट के अनुसार ब्रिटेन में पिछले साल लोगों ने फ़िल्मों से ज़्यादा पैसे विडियो गेमों पर खर्च किए। जाहिर है कि ये अब महज़ लड़कपन के खेल नहीं रहे बल्कि मनोरंजन के स्रोतों की मुख्याधारा का हिस्सा बन चुके हैं। इन गेमों के प्रति आम राय यह है कि ये हिंसा को बढ़ावा देते हैं, बेहद बिकने वाले &#8220;कॉल आफ ड्यूटी&#8221; जैसे गेमों की इस कारण काफी निंदा हुई है। जानकार मानते हैं कि निंतेंडो ने यह साबित कर दिखाया है कि छोटे बच्चे, औरतें और उम्रदराज़ भी इन गेमों का मज़ा उठा सकते हैं।</p></div>
<p>भले ही इंटरनेट-पीढ़ी के लिए, जो हाथ में माउस के साथ बड़ी हुई है, यह कोई अजीब या दुविधा वाली बात न हो पर दुनिया के ज्यादातर बाशिंदों के लिए खेल में हाथ का बँधा होना एक झंझट-सा ही है। कुछ सालों पहले निंतेंडो ने सेंसरयुक्त वीमोट (एक तरह का रिमोट नियंत्रक) के जरिए तारों के साथ-साथ बटनों से खिलाड़ियों को आज़ादी दी। निंतेंडो के इस गेमिंग प्लेटफ़ॉर्म वी (Wii) ने क्रांतिकारी रूप से विडियो खेलों को आम ड्राइंग रूमों तक पहुँचा दिया। और खिलाड़ियों को सोफ़े-कुर्सी से उठाकर खड़ा कर दिया।</p>
<p>माइक्रोसॉफ़्ट के खेल वैज्ञानिक अब वहाँ से इसे आगे बढ़ाने की कोशिश में हैं, एक नये, लगभग चमत्कारी, आविष्कार <strong>प्रोजेक्ट नटाल</strong> के साथ।</p>
<p>प्रोजेक्ट नटाल कूटनाम है माइक्रोसॉफ़्ट के एक नये गेमिंग आविष्कार का। इस पर अभी काम चल रहा है। यह माइक्रोसॉफ़्ट के XBoX 360 प्लेटफ़ॉर्म के साथ काम करेगा। एक्सबॉक्स के इस एड-ऑन के जरिये खेलने वाले बिना किसी बाहरी नियंत्रक के खेल और मनोरंजन को नियंत्रित कर सकेंगे। कैसे? अपने शरीर की स्वाभाविक नियंत्रण प्रक्रिया से &#8211; यानी बोलकर या हाथ-पैर हिलाकर।</p>
<p>यह एड-ऑन दरअसल संवेदकों (Sensors) का एक समूह होगा। एक लगभग 9-इंच चौड़ी पट्टी, जिसे आपके टीवी या कम्प्यूटर स्क्रीन के ऊपर या नीचे रखा जा सकेगा, के भीतर एक कैमरा, एक गहराई-संवेदक, और बहु-व्यूही (Multiarray) माइक्रोफ़ोन होंगे। बाक़ी काम सॉफ़्टवेयर करेगा। इसके जरिये पूरे शरीर का त्रिआयामी चित्रण, चेहरे की पहचान, आवाज़ की पहचान आदि संभव होंगे।</p>
<p>चीज़ ऐसी है कि बिना देखे यकीन आना मुश्किल है। इसकी एक झलक नीचे दिये विडियो पर देखें।</p>
<p><center><object classid="clsid:d27cdb6e-ae6d-11cf-96b8-444553540000" width="500" height="315" codebase="http://download.macromedia.com/pub/shockwave/cabs/flash/swflash.cab#version=6,0,40,0"><param name="align" value="center" /><param name="allowFullScreen" value="true" /><param name="allowscriptaccess" value="always" /><param name="src" value="http://www.youtube.com/v/I9tmr8VDqN8&amp;hl=en_US&amp;fs=1&amp;rel=0&amp;color1=0x3a3a3a&amp;color2=0x999999&amp;border=1" /><param name="allowfullscreen" value="true" /><embed type="application/x-shockwave-flash" width="500" height="315" src="http://www.youtube.com/v/I9tmr8VDqN8&amp;hl=en_US&amp;fs=1&amp;rel=0&amp;color1=0x3a3a3a&amp;color2=0x999999&amp;border=1" allowscriptaccess="always" allowfullscreen="true" align="center"></embed></object></center></p>
<p>ताज़ा अनुमानों के अनुसार, प्रोजेक्ट नटाल इस साल के नवंबर तक ख़रीदने के लिए उपलब्ध हो जाएगा। इसे वर्तमान एक्सबॉक्स कन्सोलों के साथ जोड़ कर इस्तेमाल किया जा सकेगा।</p>
<p>तो खिलाड़ियो! माउस छोड़िये, उस रिमोट को उधर फेंकिये और अपने हाथ-पैर खोलने को तैयार हो जाइए। और ज़रा एक शाबासी माइक्रोसॉफ़्ट के लिए भी हो जाए (अब ऐसी भी क्या नाराज़गी)। विडियो गेमों की दुनिया में अगली क्रांति का सेहरा उन्हीं के माथे है।</p>
<p class="note">अधिक जानकारी के लिये <a href="http://www.xbox.com/projectnatal" target="_blank">प्रोजेक्ट नटाल की वेबसाइट</a> भी देखें।</p>
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		<title>ओपनऑफ़िस एनाफ्रेसियज़ से करें तेज़, उन्नत अनुवाद</title>
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		<pubDate>Mon, 19 Oct 2009 04:59:13 +0000</pubDate>
		<dc:creator>रविशंकर श्रीवास्तव</dc:creator>
				<category><![CDATA[प्रौद्योगिकी]]></category>
		<category><![CDATA[Computer Aided Translation]]></category>
		<category><![CDATA[OpenOffice.org]]></category>
		<category><![CDATA[Translation]]></category>
		<category><![CDATA[Translation memory]]></category>
		<category><![CDATA[Unicode]]></category>

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		<description><![CDATA[रवि रतलामी बता रहे हैं अनुवाद कार्यों में अनुवादकों की सहायता करने वाले ओपनऑफ़िस.ऑर्ग ऑफ़िस सूट के इस उम्दा प्लगिन का उपयोग का सरल तरीका।]]></description>
			<content:encoded><![CDATA[<p><strong><img class="alignright size-full wp-image-154" title="anphraseus_logo" src="http://www.samayiki.com/sam/wp-content/uploads/2009/10/anphraseus_logo.jpg" alt="anphraseus_logo" width="325" height="110"  style="border:none"/>
<div class="dropCap">ओ</div>
<p>पनऑफ़िस.ऑर्ग ऑफ़िस सूट</strong> के लिए बहुत से उम्दा प्लगइन उपलब्ध हैं जिनकी सहायता से विशिष्ट किस्मों के उत्पादकता संबंधी कार्यों को बख़ूबी, त्वरित तरीके से निपटाए जा सकते हैं। <a href="http://www.openoffice.org/" target="_blank">ओपनऑफ़िस.ऑर्ग</a> राइटर के लिए एक ऐसा ही उम्दा प्लगइन है <strong>एनाफ्रेसियज़</strong> जो अनुवाद कार्य में बेहद सहायक है। एनाफ्रेसियज़ प्लगइन कम्प्यूटर की सहायता से <em><a href="http://en.wikipedia.org/wiki/Translation_memory" target="_blank">ट्रांसलेशन मेमरी</a> डाटाबेस</em> के आधार पर अर्ध-स्वचालित अनुवाद कार्यों में अनुवादकों की सहायता करता है। आइए, इसके सरल प्रयोग के बारे में जानें।</p>
<p>डाउनलोड किए एनाफ्रेसियज़ प्लगइन फ़ाइल  को ओपनऑफ़िस.ऑर्ग राइटर में संस्थापित करने हेतु <em>फ़ाइल  &gt; ओपन</em> कमांड से खोलें। इससे एनाफ्रेसियज़ प्लगइन आपके ओपनऑफ़िस.ऑर्ग राइटर में संस्थापित हो जाएगा। आपको ओपनऑफ़िस.ऑर्ग के मेन्यू में एनाफ्रेसियज़ का मेन्यू कुछ इस तरह से दिखाई देगा -</p>
<div id="attachment_151" class="wp-caption aligncenter" style="width: 450px"><a href="http://www.samayiki.com/sam/wp-content/uploads/2009/10/anphraseus_1.jpg"><img class="size-full wp-image-151" title="anphraseus_1" src="http://www.samayiki.com/sam/wp-content/uploads/2009/10/anphraseus_1.jpg" alt="ओपनऑफ़िस.ऑर्ग में एनाफ्रेसियज़ का मेन्यू " width="440" height="464" /></a><p class="wp-caption-text">ओपनऑफ़िस.ऑर्ग में एनाफ्रेसियज़ का मेन्यू </p></div>
<p>आपका ओपनऑफ़िस.ऑर्ग <em>कम्प्यूटर एडेड ट्रांसलेशन टूल</em> के रूप में आपके अनुवाद कार्य में सहायक के रूप में अब तैयार हो चुका है।</p>
<p>अब आप जिस फ़ाइल को अनुवादित करना चाहते हैं उसे ओपनऑफ़िस.ऑर्ग में खोलें। उदाहरण के लिए, अंग्रेज़ी की कोई फ़ाइल खोलें। इसके पश्चात एनाफ्रेसियज़ मेन्यू में जाकर ट्रांसलेट (<em>आल्ट + डाउन </em>कुंजी शॉर्टकट) मेन्यू पर क्लिक करें। आप देखेंगे कि अंग्रेजी में लिखे पहले वाक्य को एक अलग रंग से चमकाया गया है, तथा उसका अनुवाद करने के लिए नीचे एक अलग लाइन बना दी गई है, जिसमें संकेतक टिमटिमा रहा है।</p>
<p>अब आप अपना अनुवाद पूरा कर लें। अनुवाद पूरा कर लेने के बाद फिर से ट्रांसलेट मेन्यू पर क्लिक करें। आपका संकेतक अगले वाक्य को जिसे अनुवादित करना है, उसे चमकाएगा तथा आपको उसका अनुवाद करने के लिए एक अलग, संपादन योग्य लाइन प्रस्तुत कर देगा।</p>
<div id="attachment_152" class="wp-caption aligncenter" style="width: 407px"><a href="http://www.samayiki.com/sam/wp-content/uploads/2009/10/anphraseus_2.jpg"><img class="size-full wp-image-152" title="anphraseus_2" src="http://www.samayiki.com/sam/wp-content/uploads/2009/10/anphraseus_2.jpg" alt="एनाफ्रेसियज़ का प्रयोग" width="397" height="218" /></a><p class="wp-caption-text">एनाफ्रेसियज़ का प्रयोग</p></div>
<p>यहाँ पर (जैसा कि ऊपर चित्र में वर्णित है) आप देखेंगे कि यदि एनाफ्रेसियज़ की ट्रांसलेशन मेमरी में आपके द्वारा पूर्व में किया गया अनुवाद उपलब्ध है, अतः उसे एनाफ्रेसियज़ ने स्वचालित रूप से उसे वहां टाइप कर दिया है। यदि अनुवाद डाटाबेस में उपलब्ध नहीं है, तो आपके लिए कोई विकल्प नहीं दिया जाएगा और आपको अनुवाद स्वयं टाइप करना होगा। एनाफ्रेसियज़ की ख़ूबी यह है कि यह प्रयोग करते करते स्वतः ही अपना अनुवाद डाटाबेस बनाता जाता है। आपके पुराने अनुवाद के डाटाबेस इसमें सुरक्षित रहते हैं, और एक जैसे अनुवाद कार्यों में इससे अनुवाद में एकरूपता बनाए रखने और त्वरित अनुवाद करने में अच्छी खासी सहायता मिलती है।</p>
<p>फ़ाइल में अनुवाद का कार्य पूर्ण होने के बाद मेन्यू में <em>एनाफ्रेसियज़  &gt;  ट्रांसलेशन </em>मेन्यू पर क्लिक करें। अब आप  फ़ाइल को चाहें तो द्विभाषी रूप में सहेज सकते हैं या फिर इसकी अनुवादित फ़ाइल को अनुवाद की भाषा वाली फ़ाइल में सहेज सकते हैं। यदि आपको लगता है कि फ़ाइल का  अनुवाद परिपूर्ण है, और इसे अनुवाद की भाषा वाली फ़ाइल के रूप में प्रयोग हेतु सहेजा जा सकता है तो आपको एनाफ्रेसियज़ का फ़ाइल क्लीन कमांड चलाना होगा। इसके लिए <em>एनाफ्रेसियज़  &gt; क्लीनअप</em> मेन्यू क्लिक करें। आप देखेंगे कि ओपनऑफ़िस.ऑर्ग राइटर में आपकी फ़ाइल की अंग्रेज़ी की तमाम प्रविष्टियाँ मिट गई हैं और फ़ाइल में अब सिर्फ हिन्दी का अनुवादित पाठ ही दिखाई दे रहा है।</p>
<div id="attachment_153" class="wp-caption alignright" style="width: 197px"><a href="http://www.samayiki.com/sam/wp-content/uploads/2009/10/anphraseus_3.jpg"><img class="size-full wp-image-153" title="anphraseus_3" src="http://www.samayiki.com/sam/wp-content/uploads/2009/10/anphraseus_3.jpg" alt="एनाफ्रेसियज़ द्वारा अनुवादित फाईल" width="187" height="120" /></a><p class="wp-caption-text">एनाफ्रेसियज़ द्वारा अनुवादित फाईल</p></div>
<p>इस फ़ाइल को नए नाम से सहेज लें। बस, आपका अनुवाद कार्य पूरा हो गया। एनाफ्रेसियज़ के सेटअप मेन्यू में विविध पैरामीटरों को सेट किया जा सकता है &#8211; उदाहरण के लिए, यदि आपके पास पहले से ही कोई ट्रांसलेशन मेमरी है तो आप उसका प्रयोग कर सकते हैं, इत्यादि।</p>
<p>एनाफ्रेसियज़ कुछ कुछ अनुवाद औजार ट्रेडोस के टैग-एडीटर के जैसा काम करता है। हालांकि यह उतना उन्नत किस्म का नहीं है, मगर फिर भी मुफ़्त में उपलब्ध यह औजार छोटे मोटे अनुवाद परियोजनाओं पर बख़ूबी काम में लिया जा सकता है।
<p class=note><strong>एनाफ्रेसियज़ प्लगइन की फ़ाइल  anaphraseus_latest.oxt को <a href="http://nchc.dl.sourceforge.net/project/anaphraseus/Daily%20Snapshot/Snapshots/anaphraseus_latest.oxt" target="_blank">यहाँ से डाउनलोड करें</a>।</strong></p>
<img src="http://www.samayiki.com/sam/?ak_action=api_record_view&id=150&type=feed" alt="" />]]></content:encoded>
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		<title>हिन्दी TTS: दृष्टिबाधितों हेतु तकनीकी वरदान</title>
		<link>http://www.samayiki.com/2009/01/accessible-tech-for-blind/</link>
		<comments>http://www.samayiki.com/2009/01/accessible-tech-for-blind/#comments</comments>
		<pubDate>Thu, 29 Jan 2009 03:30:29 +0000</pubDate>
		<dc:creator>रविशंकर श्रीवास्तव</dc:creator>
				<category><![CDATA[प्रौद्योगिकी]]></category>
		<category><![CDATA[Accessibility]]></category>
		<category><![CDATA[bicentenary]]></category>
		<category><![CDATA[blind]]></category>
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		<category><![CDATA[IBM]]></category>
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		<category><![CDATA[TTS]]></category>
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		<category><![CDATA[Vozme]]></category>

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		<description><![CDATA[टेक्सट-टू-स्पीच जैसी सहायक तकनालाजी दृष्टिबाधितों के लिये कम्प्यूटर व इंटरनेट का इस्तेमाल आसान बना रही है। रवि रतलामी बता रहे हैं कि इनमें काफी अनुप्रयोग हिन्दी में भी उपलब्ध हैं।]]></description>
			<content:encoded><![CDATA[<div id="section-teaser">वर्ष 2009 ब्रेल लिपि के जनक लुई ब्रेल की जन्मद्विशती के रूप में मनाया जा रहा है। इस अवसर पर हम सामयिकी में लेखों की एक खास श्रृंखला प्रस्तुत करने जा रहे हैं। इसी  तारतम्य में पहला आलेख, दृष्टिहीनों के लिये उपलब्ध सहायक तकनलाजी में से एक <em>टेक्सट-टू-स्पीच</em> तकनाजी के क्षेत्र में उपलब्ध उत्पादों में हिन्दी पढ़ना व सुनना मुमकिन करने वाले मुफ्त एवं व्यवसायिक उत्पादों की चर्चा।।</div>
<p><span class="dropCap">दृ</span>ष्टिबाधितों के सीखने सिखाने की समस्याओं को कम्प्यूटर की नवीनतम सहायक तकनालाजी के जरिए बहुत हद तक सुलझाने की कोशिशें की जा रही हैं, और हर्ष की बात है कि इनमें से बहुत सी तकनालाजी अब हिन्दी में भी उपलब्ध हैं।</p>
<p><img src="http://www.samayiki.com/sam/wp-content/uploads/2009/01/braille_special.jpg" alt="Louis Braille: Birth Bicentenary Special" align="left" style="padding:3px;border:none" border="0"/>
<div id="pullQuoteR">विंडोज से लेकर लिनक्स तक, हिन्दी में <em>टेक्सट-टू-स्पीच (TTS)</em> यानि &#8216;पाठ से वार्ता&#8217; तथा हिन्दी <em>स्क्रीन रीडर</em> अनुप्रयोग अब सरलता से उपलब्ध हैं।</div>
<p>कम्प्यूटर पर काम करने में दृष्टिबाधितों के लिए संभवतः सबसे अहम सहायक और प्राथमिक तकनालाजी है – <em>टेक्सट-टू-स्पीच</em> यानि &#8216;पाठ से वार्ता&#8217; अनुप्रयोग। कम्प्यूटर के हर प्लेटफ़ॉर्म यानी विंडोज से लेकर ओपन सोर्स लिनक्स तक हिन्दी में पाठ से वार्ता तथा हिन्दी <em>स्क्रीन रीडर</em> अनुप्रयोग अब उपलब्ध हैं। कुछ अनुप्रयोग व्यवसायिक उत्पाद हैं तो कुछ मुफ़्त और  ओपन सोर्स यानि मुक्त स्रोत। इन अनुप्रयोगों के जरिए दृष्टिबाधित भी न सिर्फ इंटरनेट व कम्प्यूटरों पर उपलब्ध हिन्दी संसाधनों का प्रयोग अपना ज्ञान बढ़ाने के उद्देश्य से बखूबी कर सकते हैं बल्कि इनके जरिए रिकॉर्ड की गई वार्ता को सीडी या <em>यूएसबी ड्राइव</em> के जरिए सुरक्षित कर मोबाइल प्लेयरों के जरिए सुना-सुनाया जा सकता है।</p>
<h3>वर्ड का वाचक प्लगइन</h3>
<p><strong>प्रोलॉजिक </strong>का <strong>वाचक</strong> नाम का हिन्दी पाठ से वार्ता अनुप्रयोग का उन्नत संस्करण वैसे तो व्यवसायिक उत्पाद के रूप में भी जारी किया गया है, मगर इसका माईक्रोसॉफ्ट <strong>वर्ड का वाचक प्लगइन</strong> <a href="http://www.ildc.in/htm/Text2Speech.htm">यहां से</a> मुफ़्त प्रयोग हेतु डाउनलोड किया जा सकता है। 45 मेबा डाउनलोड का यह अनुप्रयोग आपके कम्प्यूटर पर संस्थापित माईक्रोसॉफ्ट वर्ड के साथ बढ़िया काम करता है।</p>
<div id="boxL">
<h3>दृष्टिहीनों को अनोखी नेमत दी ब्रेल ने</h3>
<p><img src="http://www.samayiki.com/sam/wp-content/uploads/2009/01/braille_stamp.jpg" alt="Louis Braille on Indian Postage Stamp" title="लुई ब्रेल की जन्मद्विशती के अवसर पर जनवरी 2009 में भारत सरकार द्वारा जारी नया डाक टिकट" align="middle"/></p>
<p>4 जनवरी 1809 को जन्में लूई ब्रेल केवल चार साल की आयु में अपनी एक आंख गंवा बैठे थे, खेलते समय एक सींख उनकी आंख में घुस गयी। बाद में संक्रमण के कारण उनकी दूसरी आंख भी जाती रही, 10 साल की उम्र में उनकी दृष्टि पूरी तरह ख़त्म हो गयी थी। ब्रेल को पेरिस की एक पाठशाला में टोकरी व चटाई बुनना सीखने के लिये भेज दिया गया। 1821 में एक फ्रांसिसी कप्तान से उन्होंने सैनिकों द्वारा इस्तेमाल किये जाने वाले उभरे बिंदुओं वाले एक कोड के बारे में सुना जिस पर उँगलियाँ फिराने पर <a href="http://en.wikipedia.org/wiki/Night_writing">अंधेरे में भी पढ़ना मुमकिन</a> था। नेपोलियन के निर्देश पर यह पद्धति चार्ल्स बारबियर ने बनाई थी। इसी वर्णन के आधार पर ब्रेल ने नेत्रहीनों के लिखने-पढ़ने हेतु एक वर्णमाला का निर्माण कर लिया। ऐसी लिपि जिसे छू कर पढ़ा जा सकता था।</p>
<p>ब्रेल लिपि में 6 उभरे हुए बिंदुओं के संयोजन से किसी भी भाषा के अलग-अलग अक्षर और अंक बनाए जा सकते हैं। ब्रेल ने इस लिपि का संगीत के लिए भी उपयोग किया और टंकण हेतु एक ख़ास टाईपराइटर भी बनाया।</p>
<p>दुर्भाग्यवश, ब्रेल के जीते जी उनके इस महत्वपूर्ण कार्य को खास महत्व नहीं मिला। 1852 में 43 साल की आयु में उनकी तपेदिक से मृत्यु हो गई। उनकी मौत के 100 साल बाद फ़्रांस ने ब्रेल के योगदान को पहली दफा स्वीकार करते हुये उनकी अस्थियों को पैरिस में दफ़ना कर वहाँ उनकी समाधी का निर्माण किया।</p></div>
<p>इस प्लगइन के द्वारा हिन्दी के कोई 40 फ़ॉन्टों में लिखी सामग्री जिसमें शामिल हैं – कृतिदेव से लेकर यूनिकोड मंगल तक – को हिन्दी में सुना जा सकता है। इसमें वाचन की गति को कम ज्यादा करने की भी सुविधा है। वाचक (प्लगइन में) की आवाज थोड़ी सी मशीनी लगती है, मगर समझ में भली प्रकार आती है। </p>
<h3>IIIT हैदराबाद का अनुप्रयोग: क्लिपबोर्ड से सुनें</h3>
<p>इसी तरह, <strong>IIIT हैदराबाद</strong> द्वारा जारी एक डेमो पाठ से वार्ता अनुप्रयोग (16 मेबा डाउनलोड) भी <a href="http://www.ildc.in/htm/Text2Speech.htm">इसी स्थान से</a> मुफ़्त प्रयोग हेतु डाउनलोड किया जा सकता है। इस अनुप्रयोग के जरिए <em>क्लिपबोर्ड </em>की हिन्दी यूनिकोड सामग्री को सुना जा सकता है। इस अनुप्रयोग के वाचक की आवाज प्राकृतिक आवाज के बहुत करीब है।</p>
<h3>शक्ति: तीव्र और असरदार</h3>
<p>एक अन्य हिन्दी पाठ से वार्ता अनुप्रयोग तथा स्क्रीन रीडर – <a href="http://www.blissit.org/hindiscreenreader.htm"><strong>शक्ति</strong></a> है जिसे ब्लिस द्वारा जारी किया गया है। यह उत्पाद व्यवसायिक है। इस उत्पाद की विशेषता है कि यह नई तकनीक <em>रेक-सिम-केट</em> प्रयोग करता है जिससे यह चलने में तीव्र है और कम संसाधन का प्रयोग करता है। इसकी आवाज भी प्राकृतिक होती है।</p>
<h3>फ़ेस्टिवल: हिन्दी व मराठी की क्षमता</h3>
<p><strong>फ़ेस्टिवल</strong> नाम के मुक्त स्रोत <em>टेक्सट-टू-स्पीच</em> इंजिन में कुछ समय पहले हिन्दी व मराठी भाषा की क्षमता को शामिल कर दिया गया है। यह मुफ़्त प्रयोग के लिए डाउनलोड हेतु उपलब्ध है। हिन्दी/मराठी फ़ेस्टिवल के डाउनलोड व प्रयोग के बारे में अधिक जानकारी के लिए <a href="http://raviratlami.blogspot.com/2007/01/blog-post_12.html">इस कड़ी पर</a> जाएँ। फ़ेस्टिवल भी रिकार्ड की हुई ध्वनि के बजाए कृत्रिम बुद्धिमत्ता का प्रयोग करता है।</p>
<h3>वॉजमी: ऑनलाइन पाठ से वार्ता सुविधा</h3>
<p><img src="http://www.samayiki.com/sam/wp-content/uploads/2009/01/vozme_logo.png" alt="Vozme" align="right" style="margin:5px;border:none"/>हाल ही में इंटरनेट पर भी हिन्दी पाठ से वार्ता सुविधा प्रारंभ किया गया है। यानी अब आप उन इंटरनेट कम्प्यूटरों पर भी पाठ से वार्ता सुविधा का लाभ ले सकते हैं जिनमें यह अनुप्रयोग पहले से संस्थापित नहीं है। <strong>वॉजमी </strong>नाम के <a href="http://vozme.com/index.php?lang=hi">इस इंटरनेट अनुप्रयोग</a> का प्रयोग अत्यंत आसान है। आपको इसके <em>इनपुट विंडो</em> में यूनिकोड हिन्दी में पाठ भरना है, और स्वर बटन को क्लिक करना है। थोड़ी देर में हिन्दी पाठ एमपी3 के रूप में परिवर्तित हो जाएगा जिसे चाहें तो आप <em>ऑनलाइन प्लेयर</em> के जरिए वहीं सुन सकते हैं या फिर चाहें तो डाउनलोड कर सकते हैं। हिन्दी पाठों को एमपी3 के रूप में परिवर्तित कर सहेजने के लिए यह अति सुन्दर और व्यवहारिक विकल्प है। </p>
<p>इसका <em><a href="http://vozme.com/bookmarklet.php?lang=hi">ब्राउज़र प्लगइन</a></em> भी है जिसे संस्थापित करने पर हिन्दी पाठ से वार्ता सुविधा सुविधाजनक रूप से ब्राउज़र पर ही उपलब्ध हो जाती है।</p>
<h3>वाचांतर:  सीडॅक और आईबीएम द्वारा जारी</h3>
<p>हिन्दी में माइक्रोफोन पर बोलकर टाइप करने की सुविधा भी अब उपलब्ध है और उसकी शुद्धता अस्सी प्रतिशत से भी अधिक प्राप्त की जा सकती है। <strong>वाचांतर </strong>नाम का यह सॉफ़्टवेयर सीडॅक और आईबीएम द्वारा जारी किया गया है, व इसकी कीमत 5900 रुपए है। वाचांतर हिन्दी वार्ता से पाठ अनुप्रयोग की एक संक्षिप्त समीक्षा व अन्य विवरण के लिए <a href="http://kathaakar.blogspot.com/2008/11/blog-post.html">यहाँ देखें</a>।</p>
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		<title>नया तकनीकी विश्व रचेगा भारत</title>
		<link>http://www.samayiki.com/2008/12/india-would-create-new-tech-world/</link>
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		<pubDate>Thu, 25 Dec 2008 02:30:29 +0000</pubDate>
		<dc:creator>राजेश जैन</dc:creator>
				<category><![CDATA[प्रौद्योगिकी]]></category>
		<category><![CDATA[3g]]></category>
		<category><![CDATA[incremental web]]></category>
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		<category><![CDATA[wimax]]></category>

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		<description><![CDATA[इस उभरती दुनिया के लिये उपकरण तथा सेवाओं के निर्माण में भागीदारी से भारतीय कंपनियाँ न केवल घरेलू बाजार में लाभ कमा सकती हैं बल्कि वैश्विक बाज़ारों में भी पैठ बना सकती हैं। ]]></description>
			<content:encoded><![CDATA[<p><img src="http://www.samayiki.com/sam/wp-content/uploads/2008/12/iphone_article.jpg" alt="एप्पल के आईफ़ोन से हमें भविष्य के टेलीप्यूटरों की झलक मिलती है" title="एप्पल के आईफ़ोन से हमें भविष्य के टेलीप्यूटरों की झलक मिलती है" width="599" height="395" class="aligncenter size-full wp-image-228" /></p>
<p><span class="dropCap">वि</span>गत वर्ष सेनफ्रांसिसको के एक सम्मेलन में मॉर्गन स्टेनली की <a href="http://en.wikipedia.org/wiki/Mary_Meeker" target="_blank">मेरी मीकर</a> ने जानकारी दी कि कई गैर अमरीकी बाज़ार इंटरनेट और मोबाईल यंत्रो के प्रयोग में अग्रणी हैं, जैसे कि <em>ई-कॉमर्स</em> में जर्मनी, <em>आनलाईन गेमिंग</em> में चीन, ब्रॉडबैंड में दक्षिण कोरिया, मोबाईल <em>पेमेंट </em>में जापान<em>, आनलाईन </em>विज्ञापन में ब्रिटेन, <em>सोशियल नेटवर्किंग </em>में ब्राजील व दक्षिण कोरिया तथा SMS <em>माइक्रो ट्राँसेक्ज़न</em> में फिलीपीन्स। इसी ने मुझे सोच में डाल दिया। ऐसे कौन से डिजीटल तकनलाजी के क्षेत्र हैं जिनमें भारत अग्रणी हो सकता है?</p>
<p>भारत को अगर विश्व का अगुआ बनना है तो यह घरेलू बाजार के बलबूते पर ही हो सकता है। कंपनियाँ भारतीय प्रयोक्ताओं या व्यवसाय को निशाना बना कर बढ़त हासिल करें और फिर इसी बुनियाद पर अंतरराष्ट्रीय पहुंच बनायें। हाल ही में हमने सुज़लॉन को वैकल्पिक उर्जा उद्योग क्षेत्र में यह करते देखा है। भारत किन क्षेत्रों में बढ़त हासिल कर सकता है,  इस सवाल का जवाब पाने के लिये ज़रूरी है कि हम पहले भूतकाल को समझें और इसके बाद ही कल की दुनिया की परिकल्पना करें।</p>
<p><span id="pullQuoteL">अगले 5 से 10 सालों में हम कंप्यूटर, मोबाईल फ़ोन और इंटरनेट के भिन्न रूप देखेंगे जो विकासशील देशों में अपना गहरा प्रभाव छोडेंगे।</span>पिछले 25 सालों में हमने जो भी तकनीकी प्रवर्तन देखे उनका आधार कंप्यूटर, मोबाईल फ़ोन और इंटरनेट रहे हैं। यह सभी नवाचार विकसित बाज़ारों द्वारा लाये गये जिन्होंने बाद में उद्गामी बाजारों का रुख किया। भारत में मोबाईल फ़ोन का अंगीकरण पिछले 5 सालों को सबसे बड़ी खबर रही है। तथापि कंप्यूटर व इंटरनेट के व्यापन के मामले में भारत फिसड्डी रहा है।</p>
<p>अगले 5 से 10 सालों में हम कंप्यूटर, मोबाईल फ़ोन और इंटरनेट के भिन्न रूप देखेंगे जो विकासशील देशों में अपना गहरा प्रभाव छोडेंगे। यह तिकड़ी भारत जैसे उद्गामी बाजारों में आधारभूत डिजिटल सेवाओं के निर्माण में सहायक होगी। इस आधारभूत सेवा से इन देशों की आर्थिक प्रगति की रफ़्तार भी तेज़ होगी। जिन तीन तकनीकी प्रवर्तनों पर उद्गामी बाजारों में आधारभूत डिजिटल सेवायें निर्मित होंगी वे हैं टेलीप्यूटर, यूबिनेट और एम‍-वेब।</p>
<p>टेलीप्यूटर, तकनलाजी का पूर्वानुमान लगाने वाले <a traget="_blank" href="http://www.forbes.com/2004/12/27/cz_gg_1227adviserqa_inl.html">जॉर्ज गिल्डर द्वारा दिया शब्द</a> है। इसे एक ऐसा यंत्र समझें जो मोबाईल फ़ोन और एक कंप्यूटर (सटीक रूप से कहें तो <em>नेटवर्क</em> कंप्यूटर) का मिश्रण है। मेरे विचार से टेलीप्यूटर मूलतः एक मोबाईल फ़ोन होगा जिसका एक <em>मल्टीमीडीया नेटवर्क </em>कंप्यूटर के रूप में भी इस्तेमाल किया जा सकेगा। इसे साधारण कीबोर्ड, मॉनिटर और माऊस से भी जोड़ा जा सकेगा।</p>
<p>टेलीप्यूटर को हम अपने साथ कहीं भी ले जा सकेंगे। इसके साथ इसका अपना छोटा सा <em>कीपैड</em> और <em>डिस्पले </em>होगा। इसमें अंतनिर्मित वेब ब्राउज़र होगा और बढ़िया <em>डेटा कनेक्टिविटी</em> भी उपलब्ध होगी। संभवतः भविष्य के टेलीप्यूटरों में आवाज पहचानने की क्षमता और निन्टेंडो wii <em>गेमिंग कंसोल</em> की तरह इशारे समझने की काबिलियत भी होगी। जब हमें बड़े <em>डिस्पले </em>और <em>कीबोर्ड </em>की दरकार हो हम अपने टेलीप्यूटर को ऐसे सर्वर से जोड़ देंगे जिसमें जानकारी और <em>ऐप्लीकेशन </em>भंडारित किये जायेंगे। एप्पल के आईफ़ोन से हमें भविष्य के टेलीप्यूटरों की झलक मिलती है।</p>
<p><span id="pullQuoteR">टेलीप्यूटर को हम अपने साथ कहीं भी ले जा सकेंगे। इसमें अंतनिर्मित वेब ब्राउज़र होगा और बढ़िया <em>डेटा कनेक्टिविटी </em>भी उपलब्ध होगी।</span>यूबिनेट कनेक्टिविटी का हर जगह सुलभ नेटवर्क है। यह एक तरह का सर्वव्यापी जाल होगा जिस तक कोई भी कहीं भी पहुंच सकेगा। यह बेतार और ब्रॉडबैंड चालित होगा। इसके शुरुवाती संस्करण तृतीय पीढ़ी (3G) मोबाईल, वाईमैक्स (WiMax) और बेतार मेश (Mesh Wireless) जैसी तकनलाजियों के रूप में देखे जा सकते हैं। आगामी समय के नेटवर्क में कहीं अधिक गति होगी। यूबीनेट टेलीप्यूटर पर &#8220;<em>क्लाउड कम्पयूटिंग</em>&#8221; की कल्पना को हकीकत में बदल देगा और इसका निष्पादन वैसी हो जायेगा जिसे हम अपने डेस्कटॉप पर देखने के आदि हैं।</p>
<p>एम-वेब ऐसा इंटरनेट है जो <em>पर्सनलाईज़्ड</em>, मोबाईल और तकरीबन &#8220;चमत्कारी&#8221; है। इसमें एक ऐसा <em>कंप्यूटिंग ग्रिड</em> सम्मिलित होगा जो तमाम संग्रहण और <em>प्रोसेसिंग </em>का ख्याल रखेगा। <em>परसनालाईज़ेशन </em>(व्यक्ति-विशेष के अनुसार बनाना) तो बेहद चमत्कारी अनुभव प्रदान करेगा क्योंकि टेलीप्यूटर एम-वेब से प्रासंगिक जानकारी के आधार पर यह पता लगा लेगा कि आप कौन हैं और कहाँ हैं। जाहिर तौर पर मोबाईल पर उपल्ब्ध होने के कारण एम-वेब लोगों को खूब जंचेगा।</p>
<p>आज के अंतर्जाल को &#8220;<em>रेफरेंस वेब</em>&#8221; कहा जाता है। यह एक विशाल पुस्तकालय की तरह है जिसमें लगभग सारी जानकारी बस एक बटन की दूरी पर मौजूद रहती हो। इसके सापेक्ष एम-वेब &#8220;<em>इन्क्रिमेंटल वेब</em>&#8221; होगा जो नई चीजों पर केंद्रित होगा। यह ताज़ा यानि <em>रियल टाईम</em> जानकारी के स्रोतों पर ध्यान देगा। यह बात आहिस्ता आहिस्ता मायने रखने लगेगी क्योंकि टेलीप्यूटर एक दो तरफा यंत्र होगा। इसमें महसूस और प्रतिक्रिया करने तथा लगातार सूचना प्रसारित और प्राप्त करने की काबलियत होगी।</p>
<p>आज का अधिकांश इंटरनेट <em>टेक्सट</em> आधारित है। पर एम-वेब <em>रिच मीडिया</em> पर केंद्रित होगा। मौजूदा मध्यम और उच्च श्रेणी के मोबाईल फ़ोन की तरह ही टेलीप्यूटर एक मल्टीमीडिया यंत्र है। यूबिनेट के द्वारा रिच मीडिया युक्त सामग्री भेजना और प्राप्त करना काफी आसान और सस्ता हो जायेगा।</p>
<p><span id="pullQuoteL">भारत में इस नये विश्व के निर्माण की क्षमता है क्योंकि मोबाईल फ़ोन हमारे जीवन का एक अभिन्न अंग बन चुका है।</span>एक और बड़ा बदलाव WWW से NNN की ओर होगा। NNN यानि Now, News तथा Near Web, जो भी हमारे आस पास घट रहा है उसकी सूचना उसी समय हमार टेलीप्यूटर पर भी मौजूद होगा।</p>
<p>आज के अंतर्जाल पर &#8220;खोज&#8221; चहलकदमी का मुख्य तरीका है। एम-वेब <em>सब्सक्रिप्शन </em>यानि ग्राहकी पर आधारित होगा। क्योंकि हमारा यंत्र हमेशा हमारे पास मौजूद रहेगा अतः हर आयोजन व घटना का पता तभी के तभी चल सकेगा। इसके साथ ही अंतर्जाल पर कमाई का साधन बने विज्ञापन एम-वेब पर ग्राहकी आधारित <em>इंवर्टाइज़िंग </em>का रूप गढ़ लेंगे।  <em>इंवर्टाइज़िंग </em>निमंत्रण आधारित विज्ञापन होंगे यानि ग्राहक की इज़ाजत लेकर उन तक विज्ञापन पहुंचाये जायेंगे।</p>
<p>भारत में इस नये विश्व के निर्माण की क्षमता है क्योंकि हममें से ज़्यादातर लोगों के लिये मोबाईल फ़ोन जीवन का एक अभिन्न अंग बन चुका है। टेलीप्यूटरों, यूबीनेट और एम-वेब की इस उभरती दुनिया के लिये उपकरण, नेटवर्क तथा सेवाओं के निर्माण में मदद कर भारतीय कंपनियाँ न केवल घरेलू बाजार में लाभ कमा सकती हैं वरन् वैश्विक बाज़ारों की ओर भी कदम बढ़ा सकती हैं। ये तकनीकी विशेषतायें अपनी कंपनियों का निर्माण करने वाले भारतीय उद्योगपतियों के लिये सिद्धांत रूप में काम आयेंगे। भविष्य हमसे उतना दूर नहीं जितना हमारा अनुमान है।
<p class=note>हिन्दी में अनुवादः देबाशीष चक्रवर्ती</p>
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