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	<title>सामयिकी - हिन्दी वेबपत्रिका &#124; Samayiki - Hindi Webzine &#187; youtube</title>
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	<description>बदलती दुनिया की साक्षी</description>
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		<title>सलमान के कारण मेरा नाम याद रखते हैं</title>
		<link>http://www.samayiki.com/2009/03/salman-khan-interview/</link>
		<comments>http://www.samayiki.com/2009/03/salman-khan-interview/#comments</comments>
		<pubDate>Sat, 14 Mar 2009 17:19:34 +0000</pubDate>
		<dc:creator>डॉ सुनील दीपक</dc:creator>
				<category><![CDATA[बातचीत]]></category>
		<category><![CDATA[education]]></category>
		<category><![CDATA[mathematics]]></category>
		<category><![CDATA[salman khan]]></category>
		<category><![CDATA[teaching]]></category>
		<category><![CDATA[youtube]]></category>

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		<description><![CDATA[कैलीफोर्निया निवासी बैंकर सलमान खान अपनी संस्था खान अकेडमी से इंटरनेट द्वारा मुफ्त शिक्षण उपलब्ध कराते हैं। सामयिकी के लिये डॉ सुनील दीपक ने उनसे बातचीत की।]]></description>
			<content:encoded><![CDATA[<div id="section-teaser">
<div class="dropCap">ग</div>
<p>ये दिन खाना खाने के बाद सुस्ता रहा था तो बात पढ़ाई की निकली। &#8220;गणित में तो अपना बुरा हाल था, कितनी बार ही फेल होते होते बचा&#8221;, मैंने कहा, तो सुपुत्र बोले, &#8220;तब तो <strong>सलमान खान</strong> की तरह कोई शिक्षक आप को भी मिल जाता तो ज़रूर समझ जाते।&#8221;</p>
<p><img style="margin:3px;" title="Salman Khan" src="http://www.samayiki.com/sam/wp-content/uploads/2009/03/salman_khan.jpg" alt="Salman Khan" width="300" height="201" align="right" />मुझे थोड़ी हैरानी हुई, सलमान खान और गणित के शिक्षक? आपकी ही तरह मैं भी सोच रहा था हिंदी फिल्म जगत के स्टार सलमान के बारे में, जबकि बेटा बात कर रहा था अमरीका में रहने वाले गणित, एलजेब्रा, केलकुलस आदि विषय आसानी से समझाने वाले एक अन्य सलमान खान के बारे में।</p>
<p>इस दूसरे सलमान के माता पिता बंगलादेश के प्रवासी थे। सलमान 1976 में अमरीका के न्यू ओरलिअंस शहर में पैदा हुए। उन्होंने इंजीनियरिंग और एमबीए की डिग्री प्राप्त की है और कैलीफोर्निया के मेनलो पार्क में एक बैंक में काम करते हैं। अपने खाली समय में वह इंटरनेट के माध्यम से कठिन विषयों को आसान बना कर पढ़ाते हैं। उनकी वेबसाईट <a href="http://www.khanacademy.org"><strong>खान अकेडमी डॉट ओर्ग</strong></a> पर विभिन्न विषयों पर करीब 800 पाठ हैं जिन्हें हर रोज़ करीब 15,000 लोग पढ़ते हैं।</p>
<p>प्रस्तुत है सलमान खान से एक ईमेल साक्षात्कार।</p></div>
<p><em><strong>सुनीलः</strong> सलमान, &#8220;खान अकेडमी&#8221; के बारे में बताओ। कैसे यह विचार तुम्हारे मन में आया कि इस तरह सरल वीडियो बना कर उनसे कठिन विषयों को समझाया और पढ़ाया जाये?</em></p>
<p><strong>सलमानः</strong> खान अकेडमी का ध्येय है लोगों को पूर्ण और मुफ्त शिक्षा उपलब्ध कराना। इस पर वह सब विषय हैं जिन्हें उच्चतर विद्यालय के अंतिम वर्षों और विश्वविद्यालय स्तर पर पढ़ाया जाता है। इसकी शुरुआत 2006 में हुई जब मैंने अपनी ममेरी बहन को समझाने के लिए गणित का पाठ रिकार्ड करके उसे यूट्यूब पर रखा, जिसे अन्य लोगों ने देखा और मुझे लिखा कि वह पाठ उन्हें अच्छा लगा था और कहा कि अन्य पाठ बनाऊँ। बस वहीं से मेरा यह शौक शुरु हुआ कि सरल, छोटे वीडियो पाठ बनाओ और उन्हें <a href="http://www.youtube.com/khanacademy" target="_blank">यूट्यूब पर</a> डाल दो। खान अकेडमी की वेबसाईट अप्रैल 2008 में बनायी गई।</p>
<div id="boxR" style="width: 342px;">
<h2>नये युग की पाठशालाः यूट्यूब</h2>
<p>आधुनिक युग में यूट्यूब जैसी विडियो शेयरिंग वेबसाईट से शिक्षा का क्षेत्र भी अछूता नहीं रहा है। शायद इसी काबलियत पर ऩज़र रख गूगल ने दो साल पहले यूट्यूब को 17.6 लाख डॉलर में खरीदा था। कहते हैं कि एक चित्र हज़ारों शब्दों से बेहतर होता है, पर शायद एक विडियो और भी बेहतर होता है। विडियो का सबसे बड़ा फायदा यह होता है कि इन्हें अपनी सुविधानुसार देखा जा सकता है और जितनी बार चाहें उतनी बार देखा जा सकता है। और सबसे अहम बात, यह मुफ्त में उपलब्ध हैं।</p>
<div class="wp-caption aligncenter" style="width: 340px"><img title="Khan Academy" src="http://www.samayiki.com/sam/wp-content/uploads/2009/03/salman_khan_story.jpg" alt="Khan Academy" width="330" height="235" align="middle" /><p class="wp-caption-text">सलमान माईक्रोसॉफ्ट पेंट पर पाठ समझाते हैं, उनके कंप्यूटर के स्क्रीन की छवि पार्श्व में उनकी आवाज़ के साथ कैमरे द्वारा रिकार्ड कर ली जाती है। फिर आठ मिनट के यह विडियो यूट्यूब पर अपलोड कर दिया जाते है और कड़ियाँ खान अकेडमी के जालस्थल पर डाल दी जाती हैं।</p></div>
<p>खान अकेडमी के विडियो उटपटांग हरकतें करते लोगों के घरेलू विडियो जितने लोकप्रिय भले न हो पर वे छात्रों के बड़े काम आते हैं। इसका सबूत हैं, &#8220;मैं तो फिज़िक्स का कोर्स छोड़ने ही वाला था। आपने बचा लिया&#8221; और यह &#8220;आप तो गणित के भगवान हो!!!&#8221; जैसी टिप्पणियाँ। और यह सब तब, जब सलमान के विडियो बेहद कमतर तकनलाजी से बने होते हैं और जिनमें सलमान खुद दिखते भी नहीं। मियामी विश्वविद्यालय में प्राध्यापक वॉल्टर सेकाडा जैसे <a href="http://www.msnbc.msn.com/id/28200197" target="_blank">विशेषज्ञों ने माना है</a> कि ये विडियो त्रुटिहीन हैं। उनकी शिकायत बस यह है कि परिभाषा समझाने के बजाय खान उदाहरण से शब्दों को समझाते हैं। पर आठ मिनट के विडियो में इससे ज्यादा और किया भी क्या जा सकता है।</p>
<p>खान का कदम विकाशशील राष्ट्रों के लिये नये द्वार खोलता है। शिक्षाविदों के लिये इस उदाहरण को दोहराना आसान भी है। <a href="http://sites.google.com/" target="_blank">गूगल साईट्स</a> जैसे जालसथल पर मुफ्त साईट बना सकते हैं, <a href="http://zaidlearn.blogspot.com/2008/10/8-free-screencasting-tools-for-tony.html" target="_blank">सेंकड़ों मुफ़्त के स्क्रीन रिकार्डिंग सॉफ्टवेयर</a> उपलबध हैं और सामग्री <a href="http://www.youtube.com/" target="_blank">यूट्यूब</a> या <a href="http://www.slideshare.net/" target="_blank">स्लाईडशेयर</a> पर डाली जा सकती है।</p>
<h3>खान अकेडेमी के बारे में जानकारी देता विडियो</h3>
<p><object width="340" height="285"><param name="movie" value="http://www.youtube.com/v/dP6Op2jCcJc&#038;hl=en&#038;fs=1&#038;rel=0&#038;border=1"></param><param name="allowFullScreen" value="true"></param><param name="allowscriptaccess" value="always"></param><embed src="http://www.youtube.com/v/dP6Op2jCcJc&#038;hl=en&#038;fs=1&#038;rel=0&#038;border=1" type="application/x-shockwave-flash" allowscriptaccess="always" allowfullscreen="true" width="340" height="285"></embed></object>
</div>
<p>मेरे पास अच्छी नौकरी है, मुझे पैसा नहीं चाहिये। मुझे गणित और विज्ञान के विषय बहुत अच्छे लगते हैं, और मुझे पढ़ाने का भी शौक है। इस तरह से वह बच्चे जो पढ़ना चाहते हैं पर जिनके सामने पैसे की या अन्य रुकावटें हैं, वह पढ़ सकते हैं। जब लोग मुझे ईमेल लिखते हैं कि इन पाठों से वे भारत, इथिओपिया या यूगाँडा जैसे देशों में बच्चों को पढ़ा रहे हैं तो मुझे बहुत अच्छा लगता है। इंटरनेट फ़ैलेगा तो एक दिन दूर गाँवों में बैठे बच्चे शिक्षक न होने पर भी पढ़ पायेंगे।</p>
<div id="pullQuoteL" style="margin-bottom:10px">इन पाठों से लोग भारत, इथिओपिया या यूगाँडा जैसे देशों में बच्चों को पढ़ा रहे हैं। इंटरनेट फ़ैलेगा तो एक दिन दूर गाँवों में बैठे बच्चे शिक्षक न होने पर भी पढ़ पायेंगे।</div>
<p><em><strong>सुनीलः</strong> तुम्हारे पाठ केवल दस मिनट के ही क्यों होते हैं, और उनमें तुम क्यों नहीं दिखते, केवल तुम्हारी आवाज़ ही सुनायी देती है?</em></p>
<p><strong>सलमानः</strong> यह सब यूट्यूब की वजह से है, वहाँ पर दस मिनट से अधिक लम्बे वीडियो नहीं चढ़ा सकते थे तो मैंने अपने सारे पाठ दस दस मिनट की अवधि के ही बनाये। बाद में लोग कहने लगे कि पाठ छोटा हो तो उससे समझ अच्छी आती है, तो वही दस मिनट का नियम अब भी चल रहा है। शुरु में मेरे पास वीडियो कैमरा नहीं था, पेंट के प्रोग्राम से लिख कर पाठ बनाता और माईक से साथ में समझाता तो आवाज रिकार्ड हो जाती, इसलिए वीडियो में मेरा चेहरा नहीं दिखता। पर इस बात को भी पढ़ने वाले पसंद करते हैं, कहते हैं कि लगता है कि उनके साथ बैठा कोई साथी ही समझा रहा है।</p>
<p><em><strong>सुनीलः</strong> तुम्हारा परिवार बांग्लादेश से है पर तुम अमरीका में पैदा हुए, यहीं पले और बड़े हुए। तो तुम्हारी संस्कृति की यह दो जड़े, बंगाली और न्यू ओरलिअंस की अमरीकी जड़ें, इनका आपस में किस तरह से समन्वय होता है?</em></p>
<p><strong>सलमानः</strong> जब मैं छोटा था तो न्यू ओरलिअंस में गिने चुने बंगाली परिवार थे (अब तो बहुत हैं) लेकिन तब भी वह परिवार सामाजिक दृष्टि से बहुत सक्रिय थे जिससे मेरी अपनी बंगाली पहचान बनी। यह मेरी पहचान धार्मिक और राजनीतिक भेदों से ऊपर थी। मैं दस या ग्यारह साल का हुआ था जब मुझे समझ आया कि मैं हिंदू नहीं और तभी मुझे पश्चिम बंगाल और बांग्लादेश का अंतर भी समझ में आया। तो इस तरह जब छोटी उम्र में आप दूसरे धर्म के साथ इतना गहरा सम्बंध रखते हैं तो एक धर्म के दायरे में स्वयं को बँधा महसूस करना कठिन लगता है।</p>
<p>मैं घर में मज़ाक करता हूँ कि हम लोग इस लिए न्यू ओरलियोनस में बसे क्योंकि यह बंगाल से मिलता जुलता है &#8211; खाने के लिए भरपूर मछली और सीफूड, तेज़ उमस वाला वातावरण, बड़े बड़े तिलचट्टे, बहुत सारे अजीब अजीब लोग, सब कुछ बंगाल से मिलता जुलता। दरअसल यहाँ बसने का कारण था कि मेरे पिता जो डाक्टर थे, उन्हें अस्पताल में रेज़िडेंसी की जगह यहीं मिली थी। मुझे यह भी अच्छा लगता है कि न्यू ओरलिअंस की अपनी गहरी संस्कृति और सभ्यता है। मेरे माँ के परिवार से उनके पाँच भाई और एक फुफेरा भाई भी यहीं आ कर बसे, और उन सब लोगों ने यहाँ की न्यू ओरलिअंस की सभ्यता को खुले मन से स्वीकार और आत्मसात किया है। अपने बचपन होने के दिनों में मुझे व मेरी बहन को लगता था कि हम दुनिया की सबसे अच्छी जगह पर रहते हैं।</p>
<p><em><strong>सुनीलः</strong> क्या तुम बांग्ला बोल और लिख पढ़ सकते हो?</em></p>
<p><strong>सलमानः</strong> मैं बांग्ला बोल समझ तो सकता हूँ पर मेरे बोलने के तरीके पर बंगाली लोग थोड़ा हँसते हैं। लेकिन मुझे बांग्ला लिखना या पढ़ना नहीं आता। मुझे कुछ कुछ हिंदी और उर्दू भी समझ आती हैं पर बोलने में थोड़ी कठिनाई है, हाँ अगर कोई एमरजेंसी हो तो काम चला लेता हूँ।</p>
<p><em><strong>सुनीलः</strong> काम के अलावा तुम्हारे क्या शौक हैं? क्या कोई भारतीय या बंगाली लेखक तुम्हें पसंद है?</em></p>
<p><strong>सलमानः</strong> मुझे चित्रकारी और गिटार का शौक है। भारतीय लेखकों में से मैं केवल सलमान रश्दी को जानता हूँ, जिनकी किताब &#8220;मिडनाईटस चिल्डर्न&#8221; मेरी पसंदीदा किताबों में से है। मुझे बॉलीवुड की फ़िल्मों का भी बहुत शौक है। बहुत से लोग सोचते हैं कि यह मेरी पत्नी उमाइमा का प्रभाव है क्योंकि वह बचपन में कराची में रहती थी, लेकिन यह बात सच नहीं, हिदी फ़िल्में मुझे पसंद हैं और मैं उस पर ज़ोर डालता हूँ कि चलो हिंदी फ़िल्म देखें।</p>
<p><em><strong>सुनीलः</strong> किस तरह की हिंदी फ़िल्में तुम्हें पसंद हैं? और तुम्हारा सबसे प्रिय अभिनेता या अभिनेत्री? क्या सलमान खान की फ़िल्में पसंद हैं? &#8220;द नेमसेक&#8221; और &#8220;स्लमडॉग मिलियनेयर&#8221; देखी?</em></p>
<p><strong>सलमानः</strong> &#8220;खोसला का घोसला&#8221; मुझे बहुत अच्छी लगी थी, बोमन ईरानी मुझे बहुत पंसद है। मुझे मसाला फ़िल्में भी अच्छी लगती हैं, जैसे कि &#8220;ओम शाँति ओम&#8221; मुझे बहुत अच्छी लगी थी। सलमान खान की फ़िल्में ठीक ठाक लगती हैं, कुछ खास नहीं। लेकिन उनकी वजह से लोग मेरा नाम ज़रूर याद रखते हैं। &#8220;द नेमसेक&#8221; के गोगोल में मुझे अपनी छवि दिखी थी, वैसा ही परिवारिक वातावरण, वैसे ही बाल, वैसे ही अपनी पहचान न समझ पाने का दिल पर बोझ। मैं भी लड़कपन में न्यू ओरलिअंस के एक हैवी मैटल बैंड का प्रमुख गायक था। जैसे ही मेरी बहन ने &#8220;द नेमसेक&#8221; देखी, उसने मुझे टेलीफ़ोन किया यही बताने के लिए कि फ़िल्म का गोगोल बिल्कुल मेरे जैसा था।</p>
<p>&#8220;स्लमडॉग&#8221; भी मुझे अच्छी लगी, मैंने इसे शुरु शुरु में एक फेस्टीवल में देखा जब यह फ़िल्म इतनी मशहूर नहीं हुई थी।</p>
<p><em><strong>सुनीलः</strong> इस बातचीत के लिए धन्यवाद सलमान। उम्मीद है कि तुमसे प्रेरणा लेकर कोई इस तरह के पाठ हिंदी व बांग्ला जैसी भाषाओं में भी बनाये तो यह भारत और बांग्लादेश के गाँवों के बच्चों तक भी पहुँच सकते हैं।</em></p>
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