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	<title>Comments on: ग्रामीण भारत की बदलती नारी</title>
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	<description>बदलती दुनिया की साक्षी</description>
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		<title>By: sarwesh</title>
		<link>http://www.samayiki.com/2009/12/sarpanch-sahib-review/#comment-574</link>
		<dc:creator>sarwesh</dc:creator>
		<pubDate>Wed, 16 Nov 2011 04:36:25 +0000</pubDate>
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		<description>l पढ़ कर अच्छा लगा और आशा करता हूँ देश की तरक्की होती रहे और महिलाओं का इसमें योगदान पुरुषो के बराबर का हो.पर में  एक ऐसे ग्राम से हूँ जहाँ वर्त्तमान में महिला सरपंच है और जब में देखता हूँ की किसी भी काम में उसके ससुर जी ही निर्णय लेते हैं तो दुःख होता है.हमे जरुरत है विचारधारा को बदलने की और कागजो पर बने गई नीतियों को धरातल पर जीवित करने की.तभी हम तरक्की कर सकते हैं और जैसा की हमारी संस्कृति रही है उसी के अनुसार महिलाओ को फिर से   उनका खोया सम्मान दिया जा सकता है......शाधुवाद.....</description>
		<content:encoded><![CDATA[<p>l पढ़ कर अच्छा लगा और आशा करता हूँ देश की तरक्की होती रहे और महिलाओं का इसमें योगदान पुरुषो के बराबर का हो.पर में  एक ऐसे ग्राम से हूँ जहाँ वर्त्तमान में महिला सरपंच है और जब में देखता हूँ की किसी भी काम में उसके ससुर जी ही निर्णय लेते हैं तो दुःख होता है.हमे जरुरत है विचारधारा को बदलने की और कागजो पर बने गई नीतियों को धरातल पर जीवित करने की.तभी हम तरक्की कर सकते हैं और जैसा की हमारी संस्कृति रही है उसी के अनुसार महिलाओ को फिर से   उनका खोया सम्मान दिया जा सकता है&#8230;&#8230;शाधुवाद&#8230;..</p>
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		<title>By: सुनील दीपक</title>
		<link>http://www.samayiki.com/2009/12/sarpanch-sahib-review/#comment-113</link>
		<dc:creator>सुनील दीपक</dc:creator>
		<pubDate>Tue, 29 Dec 2009 16:43:33 +0000</pubDate>
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		<description>अनुनाद, तुम्हारी बात तर्कपूर्ण लगती है, पर साथ ही प्रश्न उठता है कि अगर क्मप्यूटर या संचार का विकास अपने आप ही हो गया तो भारत में ही क्यों हुआ, अफ्रीका में उतना क्यों नहीं हुआ. अगर भारत में कम खर्चे पर उच्च शिक्षा ले पाना संभव न होता तो क्या संचार और क्मप्यूटर क्राँतियाँ भारत में आ पाती?</description>
		<content:encoded><![CDATA[<p>अनुनाद, तुम्हारी बात तर्कपूर्ण लगती है, पर साथ ही प्रश्न उठता है कि अगर क्मप्यूटर या संचार का विकास अपने आप ही हो गया तो भारत में ही क्यों हुआ, अफ्रीका में उतना क्यों नहीं हुआ. अगर भारत में कम खर्चे पर उच्च शिक्षा ले पाना संभव न होता तो क्या संचार और क्मप्यूटर क्राँतियाँ भारत में आ पाती?</p>
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		<title>By: अनुनाद सिंह</title>
		<link>http://www.samayiki.com/2009/12/sarpanch-sahib-review/#comment-112</link>
		<dc:creator>अनुनाद सिंह</dc:creator>
		<pubDate>Tue, 29 Dec 2009 05:17:49 +0000</pubDate>
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		<description>जब हम विकास की बात करते हैं तो विकास को दो भागों में बांटकर देखना तर्कपूर्ण रहेगा - पहला वह जिसे स्वाभाविक या सहज कह सकते हैं और दूसरा जो किसी के प्रयासों के परिणाम (उपज) है।  

उदाहरण के लिये भारत में  संचार क्रान्ति या कम्प्यूटर क्रान्ति का श्रेय किसी व्यक्ति या पार्टी को  नहीं दिया जा सकता। यह एक सहज प्रक्रिया का भाग है जो विश्वव्यापी है (अधिक से अधिक कोई इसे रोकने का काम कर सकता था, जो शायद नहीं किया)।  किन्तु  चुनाव सुधारों या विधिक सुधारों का  मैं दूसरी श्रेणी में मानता  हूँ। यह किसी के दिमाग में आयी; किसी ने उसको  मली जामा पहना दिया और वह अपना  काम/परिणाम दिखाने लगी।

भारत में दूसरी प्रकृति के सुधारों (या सामाजिक नवाचारों (सोसल इन्नोवेशन्स)) को बढ़ावा देने की जरूरत है।  इसी में आशा की चिनगारी छिपी हुई है।</description>
		<content:encoded><![CDATA[<p>जब हम विकास की बात करते हैं तो विकास को दो भागों में बांटकर देखना तर्कपूर्ण रहेगा &#8211; पहला वह जिसे स्वाभाविक या सहज कह सकते हैं और दूसरा जो किसी के प्रयासों के परिणाम (उपज) है।  </p>
<p>उदाहरण के लिये भारत में  संचार क्रान्ति या कम्प्यूटर क्रान्ति का श्रेय किसी व्यक्ति या पार्टी को  नहीं दिया जा सकता। यह एक सहज प्रक्रिया का भाग है जो विश्वव्यापी है (अधिक से अधिक कोई इसे रोकने का काम कर सकता था, जो शायद नहीं किया)।  किन्तु  चुनाव सुधारों या विधिक सुधारों का  मैं दूसरी श्रेणी में मानता  हूँ। यह किसी के दिमाग में आयी; किसी ने उसको  मली जामा पहना दिया और वह अपना  काम/परिणाम दिखाने लगी।</p>
<p>भारत में दूसरी प्रकृति के सुधारों (या सामाजिक नवाचारों (सोसल इन्नोवेशन्स)) को बढ़ावा देने की जरूरत है।  इसी में आशा की चिनगारी छिपी हुई है।</p>
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